सोमवार, 5 सितंबर 2005

बातें स्कूल के दिनों की
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मैं कक्षा में हमेशा प्रथम आने के कारण स्कूल में सभी अध्यापिकाओं की चहेती थी । जब मैं छठी कक्षा में थी तब हमारी अंग्रेजी की अध्यापिका श्रीमती सलूजा थीं । एक बार परीक्षा में मैंने अंग्रेज़ी के प्रार्थना पत्र में एक गलती की तो उन्होंने मेरा एक अंक काट लिया जबकि अन्य लड़कियों की तीन गलतियाँ होने पर एक अंक काटा । इस बारे में मैंने जब उनसे शिकायत की तो उन्होंने उत्तर दिया कि उन सब से अपनी तुलना मत करो, मुझे तुमसे गलती की आशा नहीं है, इसलिए ही मैंने तुम्हारा एक अंक काटा है जिससे भविष्य में तुम गलती न करो । उनकी उस बात से मुझे बहुत प्रेरणा मिली और मैं परीक्षा में ज्यादा सावधान रहने लगी।

नवीं कक्षा में हमारी सामाजिक विज्ञान की अध्यापिका श्रीमती सतनाम थीं । वे छोटे कद की गोलमटोल महिला थीं अत: हम आपस में उन्हें ड्रम कहते थे । सामाजिक विज्ञान में मेरी रूचि न के बराबर थी अत: उनकी अनुपस्थिती बहुत खुशी देती थी । हमारे स्कूल में सूचना पट्ट पर अध्यापिकाओं की छुट्टी की सूचना हर रोज़ लगाई जाती थी । कक्षा मॉनीटर होने के कारण मैं ही सूचना पट्ट देखने जाती थी । एक दिन सामाजिक विज्ञान का पीरियड शुरु होने पर भी जब सतनाम मैम नहीं आईं तो मैं सूचना पट्ट देखने गई । वहाँ लिखा था कि आज वे अनुपस्थित हैं तथा कक्षा मॉनीटर ही कक्षा में अनुशासन रखेगी । यह देखकर मैं खुशी से भागती हुई कक्षा में आई और मेज़ पर खड़े होकर ज़ोर-ज़ोर से हाथ हिलाते हुए बोली "चलो बच्चों खुश हो जाओ, आज ड्रम नहीं आया है" । उसी समय सतनाम मैम बोलीं, शालिनी नीचे उतरो मैं यहीं खड़ी हूँ । मेरे ऊपर तो घड़ों पानी पड़ गया । उस दिन के बाद से वे कक्षा में आते ही मुझे आगे खड़ा कर देती थीं जिससॆ मैं कुछ शैतानी न कर पाऊँ । आज 20 साल बाद भी मुझे यह घटना याद आती है तो हँसी रोकना मुश्किल हो जाता है।

ऐसे थे वे स्कूल के दिन, खुशी, मस्ती और बेफिक्री से भरे । सच ही है कि विद्यार्थी जीवन सब से अच्छा होता है । स्कूल और ज़िंदगी में फर्क बताते हुए किसी ने कहा है कि स्कूल में पहले सबक सिखाया जाता है और फिर परीक्षा ली जाती है पर ज़िंदगी पहले परीक्षा लेती है फिर सबक सिखाती है।
(शिक्षक दिवस पर मेरी सभी अध्यापिकाओं को सादर समर्पित)

1 टिप्पणी:

Raman ने कहा…

Yes you are right, school times are hard to find but hardly forgot.
School times is better that college ones.